ईमानदारी ही वो आग है, जो भ्रष्टाचारियों की चिता जलाएगी, तभी तो ईमानदार नेता की सूरत दिल में बस पाएगी!

उज्जवल प्रकाश तिवारी : एक परिचय

उज्जवल प्रकाश तिवारी जिनका जन्म रांची जिला में हुआ था, आज राज्य की राजनीति में एक चर्चित नाम है। कांग्रेस पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले उज्जवल प्रकाश तिवारी वर्तमान में राज्य सरकार के एक महत्वपूर्ण अंग का हिस्सा है। वे झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य हैं। इस रूप में उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त है। इसके पद पर रहते राज्य के बच्चों के अधिकारों के लिए वे हमेशा से सक्रिय रहे हैं। इसके अलावा राजनीति क्षेत्र में रहते हुए उज्जवल प्रकाश तिवारी सामाजिक कार्यों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते रहे हैं। उनका मानना है कि राजनीति एक ऐसा पटल है, जहां से सामाजिक कार्यों को पूरी तरह से निभाया जा सकता है।

बात उज्जवल तिवारी की राजनीतिक पृष्ठभूमि की करें, तो उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा के बाद ही उन्होंने इस क्षेत्र में प्रवेश किया। अपने शुरूआती दिनों की शुरूआत उन्होंने नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) से की, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की छात्र शाखा है। एनएसयूआई में रहते उन्होंने छात्र राजनीति में अपनी भागीदारी प्रमुखता से निभायी। कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक जहां भी छात्रों के अधिकारों के हनन का मुद्दा उठा, वहां वे उनकी आवाज बनकर उभरे। उनकी कार्यशैली को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ने उनकी काबिलियत को देखा और पार्टी के महत्वपूर्ण पदों का दायित्व सौंपा। उन्हें युवा कांग्रेस में जगह दी गई। रांची विधानसभा में उन्हें सचिव बनाया गया। इस दौरान भी उनकी युवाओं के अधिकारों के प्रति सक्रियता को बनाए रखा। उसके बाद उन्हें युवा कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय पदों पर जगह दी गई। वे युवा कांग्रेस में राज्य महासचिव बनाए गए। प्रदेश की सत्ता में जब कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में थी, तो उन्होंने तत्कालीन सरकार के सभी तानाशाही कार्यशैली का खुलकर विरोध किया। विधानसभा घेराव कार्यक्रम से लेकर सड़क तक के आंदोलन में वे हमेशा आगे रहे।

कांग्रेस पार्टी की सरकार में आने के बाद उज्जवल प्रकाश तिवारी को उचित सम्मान देते हुए सरकार के महत्वपूर्ण अंग में शामिल किया गया। झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य के रूप में उन्होंने जगह मिली। इस दौरान उनकी भूमिका बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने, बाल श्रम को रोकने पर प्रमुखता से रहा है। वे लगातार सामाजिक कार्यों में अपनी सहभागिता दिखा रहे है। उनके प्रयास से लगातार स्वास्थ्य कैंप का आयोजन होता रहा है। विभिन्न जिलों के निरंतर दौरा करते हुए वे बाल श्रम रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की मॉनिटरिंग करते रहे है। सभी धर्मों में सर्वधर्म समभाव को बढ़ाने के लिए उनके पर्व-त्योहारों में वे सेवा शिविर भी लगाते हैं।

उज्जवल प्रकाश तिवारी की सोच समावेशिता और सभी के विकास पर केंद्रित है। इसी सोच के साथ उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक कार्यों को अपने जीवन में उतरा है। उनकी सोच है जब तक वे इसे धरातल पर नहीं उतारते, तब तक उनकी सेवा अधूरी ही रहेगी। उनकी सोच है कि एक अच्छा नेता लोगों को उन पर भरोसा करने के लिए प्रेरित करता है। इसी सोच के साथ उज्जवल प्रकाश तिवारी ने अपने जीवन का एक लक्ष्य यही बनाया है कि "ईमानदारी ही वो आग है ,जो भ्रष्टाचारियों की चिता जलाएगी" "तभी तो ईमानदार नेता की सूरत दिल में बस पाएगी!"

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